युवराज ! हाँ, वही खिलाड़ी जिसने भारत को 2011 में विश्व विजेता बना दिया. मुझे जब से क्रिकेट की समझ आई, उनमें केवल तीन ही ऐसे खिलाड़ी (सचिन, सहवाग, युवराज) थे जो मुझे बेहद पसंद थे, अब भी हैं और हमेशा रहेंगे. युवराज जैसे खिलाड़ी विरले ही हैं. मैं और मेरे चाचा हमेशा से युवराज के बड़े फैन रहे हैं.

मेरे गाँव में एक दादा जी हैं, क्रिकेट के बहुत कर्रे फैन. वो अक्सर मैच के दौरान मजाकिया तौर पर कहा करते थे टीम में दो चींटे (कैफ और युवराज) हैं जिनके बीच से गुड़ की एक डली (गेंद) कोई नहीं निकाल सकता. दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में गिने जाने वाले खिलाड़ी भी मैदान में युवराज के क्षेत्र के आसपास शॉट खेलने में घबराते थे, वजह थी युवराज का क्षेत्ररक्षण यानि कि रन चुराने की कोशिश और रन आउट…

आज भी मुझे याद है एक बार युवराज ने सीमारेखा से डायरेक्ट थ्रो मारा था और रन आउट किया था. फुर्ती एकदम चीते जैसी… युवराज सिंह उस समय की टीम इंडिया के जोंटी रोड्स थे, प्वॉइंट पर खड़े इस फुर्तीले फील्डर ने जॉन्टी रोड्स वाला खौफ बल्लेबाज़ों में भी पैदा किया. उस दौर में मैदान पर अगर फील्डिंग का अलग लेवल सेट किया तो उसमें युवी नायक थे तो साथ मिला मोहम्मद कैफ का… यदि आज भारत में कई बेहतरीन फील्डर हैं तो कहीं न कहीं युवराज का उसमें योगदान अवश्य है.
दुनिया भर में ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों का कहर माना जाता था, लेकिन अगर मन भर के युवराज ने किसी को कूंचा है तो उनमें मैक्ग्रा, मिशेल जानसन, ब्रेट ली, डेरेन लेहमन, जेसन गिलेस्पी, नाथन ब्रेकेन शामिल थे. युवराज का टीम में होना विपक्षियों के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव होता था. हर गेंदबाज बस यही सोचता था कि सामने युवराज है, बाल कहाँ फेंकी जाए, क्योंकि उसे पता होता था कि एक गलती और गेंद का धागा खुलना तय…

धोनी की बायोपिक में इस बात का जिक्र भी है जहाँ धोनी बने (सुशांत सिंह राजपूत) कहते हैं कि…“डे 2 में हम आउट हो गए 84 रन पे. पूरा टीम आउट हो गया 357 रन पे. अब पंजाब बैटिंग करने आता है. उनका पहला विकेट गिरता है 60 पर. फिर बैटिंग करने आता है युवराज सिंह. डे 2 के एंड का स्कोर 108 पे 1. पूरे डे 3 में उनका सिर्फ एक्के विकेट गिरता है. डे 3 के एंड का स्कोर 431 पे 2. युवराज सिंह डबल सेंचुरी. बहुत मारा. धागा खोल दिया एकदम. लास्ट डे डे-4. पंजाब का टोटल 839. युवराज का अकेले का स्कोर 358. बिहार के टोटल से एक रन ज़्यादा.”

2003 के विश्वकप में तमाम महारथियों के साथ-साथ युवराज का भी महत्वपूर्ण योगदान था। युवराज ने सिर्फ़ फील्डिंग और बल्लेबाज़ी से ही नहीं अपनी गेंदबाज़ी से भी भारत को कई मैच जिताए हैं। 2007 T-20 विश्व कप को कोई कैसे भूल सकता है? जिन बॉउंसर से भारतीय बल्लेबाज़ों में खौफ होता था उस दौर में ये खिलाड़ी बाउंसर वाले गेंदबाज़ों को पुल कर छक्के जड़ता था.

वो मैच मुझे आज भी याद है जब फ़्लिंटॉफ़ से कहासुनी के बाद भिन्नाये युवराज ने अगले ओवर में ही 6 गेंदों में 6 छक्के मार कर एक नया कीर्तिमान रचा था, उस मैच में रवि शास्त्री भी चिल्ला पड़े थे “This is in the air again. Clears long on. Three in a row. छह छक्के पड़ने के बाद शास्त्री फिर से अपनी भारी भरकम आवाज़ के साथ तगड़ी वाली अंग्रेजी में बोल पड़ते है.. Six sixes in an over and Yuvraj singh finishes things of his styles.” स्टुअर्ट ब्रॉड बस इतना सोच रहे थे कि आखिर मेरे साथ हो क्या रहा है, और फ़्लिंटॉफ़ तो इस इंतज़ार में थे कि बस धरती फट जाए और मैं उसी में समा जाऊं. युवराज सिंह सिर्फ़ स्टुअर्ट ब्रॉड के लिए ही नहीं तमाम गेंदबाज़ों के लिए एक बुरे सपने की तरह हैं.

2011 विश्व कप… शायद ही दुनिया को पता था लेकिन युवराज और उनकी माँ को पता था की वो किस दौर से गुजर रहे है, कैंसर से जूझते रहने के बावजूद युवराज का प्रदर्शन बेहतरीन था, इनका ऑलराउंड प्रदर्शन ही था जिसके कारण 2011 विश्व कप में युवराज मैन ऑफ़ द सीरीज बने थे. एक बड़े प्रशंसक के तौर पर लिखने को बहुत कुछ है आपके बारे में.. युवराज आप हमेशा युवराज थे, हैं और रहेंगे … तुस्सी ग्रेट हो पा जी… जन्मदिन पर आपको ढेरों बधाईयाँ…






