शौर्य चक्र विजेता गुंजन सक्सेना की बायोपिक है.यह फिल्म बहुत ही इंस्पायरिंग है और देशभक्ति और बहादुरी के जज्बे से भरपूर है. ‘गुंजन सक्सेनाः द कारगिल गर्ल’ में गुंजन के पायलट बनने और फिर कारगिल में युद्ध भूमि में जौहर दिखाने को दिखाया गया है.ये उन तमाम महिलाओं को प्रेरणा देगी जो अपने जीवन में बहुत सी परेशानियों से लड़कर सफल होती है ऐसी ही है – गुंजन सक्सेना .

आजकल बायोपिक्स ट्रेंडिंग में है हाल ही में आयी ‘शकुंतला देवी ‘ के बाद अब फिल्म ‘गुंजन सक्सेना -द करगिल गर्ल ‘ जल्द यानि की इसे कल 12 अगस्त 2020 को रिलीज़ किया जा रहा है ..इस कहानी की बात करे तो ये कहानी है भारत की पहली एयरफोर्स पायलट गुंजन की. जिन्होंने भारत पाकिस्तान के 1999 युद्ध में नजाने कितनों की जान बचायी थी. फिल्म की ख़ास बात है कि बाकी युद्ध पर आधारित फिल्मों की तरह देश भक्ति का नारा नहीं लगाया गया है और ना ही गुंजन के प्रेम प्रसंग जैसा कुछ दिखाए गए हैं.अब तक शादी ब्याह , रोमांस, युवाओं और विदेश में बसे भारतीयों पर फिल्में बनाने वाले करण जोहर इस फिल्म के प्रोड्यूसर है. इस बार उनकी कंपनी और टीम ने कुछ हटके बनाने की पुरजोर कोशिश की है .

कोरोना के चलते सिनेमाघर के लिए बनी ये फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है. बिना किसी ड्रामे और मिर्च-मसाले के ये फिल्म गुंजन के पायलट बनने की कहानी और इस दौरान किस तरह की परेशानी को वो हैंडल करती है, उस पर फिल्म में बखूबी प्रकाश डाला गया है. हॉलीवुड की बात करें तो एयरफोर्स पर बहुत फिल्में बनीं है. हिंदी फिल्मों में जहां आर्मी पर बहुत फिल्में बनीं हैं. एयरफोर्स पर चुनिंदा फिल्में ही बनी हैं जैसे हिंदुस्तान की कसम , विजेता ,अग्निपंख और मौस.

गुंजन सक्सेना -द करगिल गर्ल ‘ …कुछ -कुछ शशि कपूर और रेखा की 1982 में बनीं फिल्म ‘विजेता ‘और ऋतिक रोशन की 2004 की फिल्म ‘लक्ष्य ‘ की याद दिलाती है. फिल्म ने करगिल युद्ध की नारेबाजी नहीं है बल्कि एक महिला अफसर की परेशानी और उससे कैसे बिना भाषण बाज़ी के निपटकर गुंजन के सफल होने की कहानी है .

आपको बता दे की इस फिल्म का निर्देशक शरन शर्मा ने की है ये उनकी पहली फिल्म है और फिल्म की कहानी को उन्होंने रोचक अंदाज़ में पेश किया है. हवाई युद्ध के सीक्वेंसेस को काफी अलसियत के साथ दिखाया गया है . आम फिल्मों के वॉर सीक्वेंसेस से हटकर इस फिल्म में एयरफोर्स के काम को बहुत बारीकी लेकिन सहज अंदाज़ में दिखाया गया है.

बताते चले की इस फिल्म में जाह्नवी कपूर और पंकज त्रिपाठी (बाप-बेटी) की जुगलबंदी बहुत ही मजेदार है. अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपने सहज अभिनय से गुंजन के पिता और एक आर्मी अफसर के रोल को यादगार बना दिया है .जैसे एक सीन है जहां गुंजन को एयरफोर्स का एग्जाम पास करने के लिए वजन घटाना होता है और पंकज यानी गुंजन के पिता अभिनेत्री रेखा को उसकी प्रेरणा बनाते हैं. जब गुंजन हताश होकर घर आती है तो लेक्चर देने की बजाय वो उसे रसोई में ले जाकर ज़िन्दगी के आटे दाल का भाव बताते हैं .फिल्म में गुंजन के किरदार को निभाने के लिए जाह्नवी कपूर काफी कोशिश करती नजर आती हैं और वो इसमें सफल भी रही है . इसके अलावा अंगद बेदी ने भी अपना बेस्ट दिया हैं, साथ ही विनीत कुमार सिंह ने अच्छा काम किया है, और मानव विज छोटा रोल होने के बाद भी ध्यान खींचते हैं.

कुल मिलकर गुंजन सक्सेना एक साफ़ सुथरी फिल्म है .. जहां पर महिला के संघर्ष और करगिल युद्ध में भारत की महिला एयरफोर्स अफसर की जांबाज़ी को मनोरंजक अंदाज़ में पेश किया गया है .
वैसे इस साल गुंजन सक्सेना बाद जल्द ही एयर फाॅर्स ऑफिसर्स की ज़िन्दगी पर और फिल्म आ रही है . एक है विजय कार्णिक की ज़िन्दगी पर आधारित अजय देवगन की ‘भुज दा प्राइड ऑफ़ इंडिया ‘…तो वहीं पर करण जौहर भी कप्तान विक्रम मल्होत्रा के जीवन पर आधारित ‘शेरशाह’ लेकर आएंगे.

फ़िलहाल इस तरह नेटफ्लिक्स फिल्म ‘गुंजन सक्सेनाः द कारगिल गर्ल (Gunjan Saxena: The Kargil Girl)’ रियल लाइफ महिला पायलट की जिंदगी को समझने की एक सफल कोशिश है.






