अयोध्या में 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीराम मंदिर निर्माण का भूमि पूजन करेंगे। 1989 में प्रस्तावित मंदिर के मॉडल में बदलाव कर इसे और भव्य बना दिया गया है। पहले मंदिर के मुख्य शिखर की ऊंचाई 128 फीट थी। अब यह 161 फीट होगी। तीन की जगह पांच गुंबद और एक मुख्य शिखर होगा। अयोध्या में शिलान्यास की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद शनिवार को अयोध्या का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा की।
साढ़े तीन साल में सिर्फ मंदिर बनकर तैयार होगा। यह ट्रस्ट की बैठक में तय किया जा चुका है। इसके परिसर का काम चलता रहेगा। परिसर का काम कौन करेगा? यह ट्रस्ट तय करेगा। हालांकि ट्रस्ट ने लिस्ट बना ली है कि परिसर में क्या सुविधाएं होंगी। अब जिन्हें बनाने का काम दिया जाएगा, वह बनाएंगे। राम मंदिर का नक्शा तैयार है। बाकी परिसर का नक्शा तैयार किया जा रहा है।
कार्यशाला में जो पत्थर तराशे हुए रखे हैं, उनका इस्तेमाल किया जाएगा। इनके अलावा भी बहुत से पत्थर चाहिए होंगे। यह भी राजस्थान के बंशीपुर पहाड़पुर से आएंगे। हालांकि, इन्हें अयोध्या में तराशा जाएगा या ये राजस्थान से ही तराशकर लाए जाएंगे? यह एलएनटी (लार्सन एंड टर्बो कंपनी) तय करेगी। कितना मैन पावर या मशीनें लगेंगी यह भी एलएनटी ही तय करेगी। अभी उनका रिसर्च वर्क चल रहा है।
डेटा अब कलेक्ट किया जा रहा है। जितनी ज्यादा मशीनरी इस्तेमाल होगी, मैन पावर उतना ही कम लगेगा। इस समय कई बड़ी-बड़ी मशीन हैं, जो मंदिर बनाने में उपयोग की जा सकती हैं। अभी एलएनटी मंदिर के अलग-अलग हिस्से के निर्माण के लिए अलग-अलग लोगों को काम बांटेगी। उसके बाद ही तय होगा कि कितना मैन पावर लगेगा।
मंदिर मजबूत बने, इसके लिए कितनी गहरी नींव खोदनी है। अंदर की मिट्टी कितना भार सह पाएगी यह कुछ कहा नही जा सकता। इसके लिए 200 फीट पर सॉयल सैंपलिंग (मृदा परीक्षण) कराई गई है। जब उसकी रिपोर्ट आएगी तभी तय होगा कि नींव कितनी गहरी होगी। यह भी एलएनटी तय करेगी।






