अभी तक आपने क्वारंटीन में रखे गए जमातियों द्वारा अस्पताल परिसर में तोड़-फोड़, नर्सों के साथ बदतमीजी की खबरें पढ़ी ही होंगी। लेकिन राजस्थान के सीकर जिले में क्वारंटीन में रखे गए मजदूरों ने एक ऐसा काम किया है कि पूरे देश में इन मजदूरों की चर्चाएं हो रही हैं। खुद बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के एसीएस रोहित कुमार सिंह ने इन मजदूरों की तारीफ की है।
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में 3 मई तक के लिए लॉकडाउन घोषित है। मतलब जो व्यक्ति जहां है, वहीं ठहरा हुआ है। लाखों मजदूर दूसरे राज्यों से अपने घर नहीं लौट सके हैं। रास्ते में किसी ना किसी शहर-कस्बे में फंसे हुए हैं। किसी ने स्कूल-कॉलेजों में बनाए गए पलायन सेंटर में डेरा डाल रखा है तो कोई धर्मशालाओं में रुका हुआ है। कहीं सरकार तो कहीं भामाशाहों के सहयोग से इन मजदूरों को भोजन मुहैया करवाया जा रहा है।

राजस्थान के सीकर जिले के पलसाना के शहीद सीताराम कुमावत व सेठ केएल ताम्बी राउमावि में पलायन सेंटर चलाते हैं । यहां हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, एमपी, यूपी के 54 मजदूर ठहरे हुए हैं। ये सभी लोग पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं और इनका क्वारंटाइन समय भी पूरा हो गया है।
सेंटर पर ठहरे मजदूरों ने बताया कि वो मेहनतकश लोग हैं, ठाले बैठे तो बीमार हो जाएंगे। सरपंच और गांव के भामाशाहों ने हमारे लिए बहुत ही अच्छी व्यवस्था कर रखी है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते । बदले में गांव के लिए हम भी कुछ करना चाहते हैं। अभी हमें बाहर तो जाने दिया जाएगा नहीं । ऐसे में स्कूल की पुताई शुरू कर दी है । उन्होंने सरपँच से रंग – रोगन का सामान लाकर देने की माँग की । सरपँच व विद्यालय स्टाफ़ की ओर से सामग्री उपलब्ध कराने के बाद हम सब ने विद्यालय में रँगाई पुताई का कार्य शुरू कर दिया ।

मज़दूरों के व्यवहार से पूरा गाँव अभिभूत : सरपंच रूपसिंह शेखावत
सरपंच रूपसिंह शेखावत ने बताया कि मजदूरों ने उनके सामने मांग रखी कि वे इस पलायन सेंटर स्कूल के साथ अच्छी याद जोड़ना चाहते हैं। इतने दिन तो हम स्कूल की सफाई कर रहे थे, मगर अब रंगाई-पुताई करना चाहते हैं। ऐसे में सामग्री उपलब्ध करवाई जाए। सरपंच व विद्यालय स्टाफ की ओर से सामग्री उपलब्ध कराने के बाद मजूदरों ने विद्यालय में रंगाई पुताई का कार्य शुरू कर दिया।
स्टाफ़ व जनसहयोग से सम्भव हुआ
प्रधानाचार्य राजेंद्र कुमार मीणा ने बताया कि स्कूल में मजदूरों से 30 दिन से ज्यादा का समय हो गया। इनके लिए स्कूल में ही भोजन तैयार किया जा रहा है। लॉकडाउन के चलते इन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जा रही है। मजदूरों ने यहां उनके लिए की गई व्यवस्थाओं से खुश होकर ही रंगाई-पुताई का काम करने की ठानी है

ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने कहा ये तो रोल मॉडल है
शिविर का निरीक्षण करने गए ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव जगतसिंह पंवार ने सेंटर का निरीक्षण कर सेंटर पर ठहरे लोगों को विद्यालय परिसर में कार्य करते देख वे काफ़ी खुश हुए । पंवार ने मज़दूरों के विचार सुनकर उनकी तारीफ़ और कहा कि यहाँ के सरपँच, विद्यालय स्टाफ़ एवं भामाशाहों के साथ ही प्रवासी लोगों की ओर से एक परिवार की तरह किया जा रहा कार्य अन्य सेंटर के लिए रोल मॉडल है ।






