आरबीआई ने कोरोनावायरस से उपजे संकट के कारण लॉकडाउन के बीच लोन ग्राहकों को EMI पर 3 महीने की मोहलत दी और कई बैकों ने EMI रोकने का विकल्प ग्राहकों को दे भी दिया है। लेकिन आप जानते हैं, EMI रोकने पर आपको कितना ज्यादा पेमेंट करना होगा? अगर आप EMI रोकने का वकल्प अपनाते हैं तो ऐसा नहीं है कि आपकी कुल किस्तों में सिर्फ 3 ही किस्तें जुड़ेंगी। हैरान मत होइए, हम आपको समझाते हैं इसका पूरा गणित।
बैंकों ने लोनधारकों से गुजारिश की है कि अगर उनके पास कैश नहीं है तो EMI टालने दें। लेकिन साथ में यह भी कहा है कि अगर अवधि के अंत में रीपेमेंट नहीं किया जाता है तो तीन महीने का ब्याज कंपाउंडेड हो जाएगा। अगर ऐसा होता है तो कई महीने और किस्त चुकाना पड़ जाएगा।
मान लीजिए आपने किसी बैंक से 30 लाख रुपये का लोन लिया है, जिसकी 15 महीनों की किस्त बाकी है। इस लिहाज से नेट अडिश्नल इंट्रेस्ट 2.34 लाख रुपये होगा। यह रकम 8 EMIs के बराबर है। इसी तरह मान लें कि किसी ने 6 लाख रुपये का लोन लिया है, जिसकी मैच्योरिटी 54 महीने बाकी है। इस लोन के लिए अतिरिक्त ब्ंयाज 19000 रुपये होगा, यानी डेढ़ महीनों की EMI के बराबर। यह कैलकुलेशन ब्याज दरों में कोई बदलाव न मानते हुए की गई है, साथ ही प्रीपेमेंट न होना भी इसका आधार है।






